jawab
हरे कृष्ण 🙏
सार यह है कि स्त्री या पुरुष किसी के बंधन का कारण नहीं हैं। भगवान ने दोनों को अपनी ही शक्ति से बनाया है, और संसार में फँसने का वास्तविक कारण शरीर नहीं बल्कि मन की कामना और आसक्ति है। कुछ महान ऋषियों द्वारा बिना स्त्री के संतान उत्पन्न होना सामान्य नियम नहीं, बल्कि विशेष दिव्य घटनाएँ थीं। भगवान की सृष्टि पूर्ण है — इसमें माता-पिता का प्रेम, सेवा, करुणा और विभिन्न प्रकार के संबंधों के माध्यम से आत्मा सीखती और परिपक्व होती है। यदि भगवान को भूल जाएँ तो ब्रह्मचारी भी बँध सकता है, और यदि भगवान को याद रखें तो गृहस्थ भी मुक्त हो सकता है। इसलिए समस्या स्त्री या पुरुष नहीं, बल्कि भगवान से दूर होना है; और समाधान है भक्ति, स्मरण और शरणागति। 🙏
Comments
Post a Comment