Sri Srinivasa thakur
श्री रामचन्द्र कविराज, खंडवासी चिरंजीव और सुनन्दा के पुत्र थे। वे श्रीनिवास आचार्य के शिष्य तथा नरोत्तम दास ठाकुर के अत्यंत अंतरंग मित्र थे, जो बार-बार उनके संग की प्रार्थना करते थे। उनके छोटे भाई गोविन्द कविराज थे। श्रील जीव गोस्वामी ने श्री रामचन्द्र कविराज की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति महान भक्ति की अत्यंत प्रशंसा की और उन्हें “कविराज” की उपाधि दी। श्री रामचन्द्र कविराज सदैव गृहस्थ जीवन में अरुचि रखते थे और उन्होंने श्रीनिवास आचार्य तथा नरोत्तम दास ठाकुर के प्रचार कार्य में अत्यधिक सहायता की। वे पहले श्रीखंड में रहते थे, बाद में गंगा के तट पर स्थित कुमार-नगर ग्राम में रहने लगे। गोविन्द कविराज, रामचन्द्र कविराज के भाई और श्रीखंड के चिरंजीव के सबसे छोटे पुत्र थे। प्रारम्भ में वे शक्ति उपासक (दुर्गा के उपासक) थे, परन्तु बाद में उन्होंने श्रीनिवास आचार्य प्रभु से दीक्षा ली। गोविन्द कविराज भी पहले श्रीखंड में रहते थे और फिर कुमार-नगर में, परन्तु बाद में वे पद्मा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित तेलिया बुधरी ग्राम में चले गए। गोविन्द कविराज, जो “संगीत-माधव” और “गीतमृत” नामक दो ग्रंथों के लेखक थे,...